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हमारी मस्जिद के इमाम चोर हैं ?? ( एक नसीहत अमूज वाकिया ) By ©Al Husaini Network© 【 Hafiz Warish Qadri Al Husaini 】

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हमारी मस्जिद के इमाम चोर हैं ?? ( एक नसीहत अमूज वाकिया ) एक बार अफ्रीका के एक गांव में एक इमाम मुकर्रर किए गए, बेहतरीन हाफ़िज़ होने के साथ साथ क़ुरआन मजीद की तिलावत बड़ी शानदार करते थे, वक़्त के पाबंद और तकवे वाले थे, लिहाज़ा लोगों को बहुत पसंद आए, गांव के लोग बड़ी इज्जत करने लगे, उस गांव का हर आदमी उस इमाम की दावत करना अपने लिए इज्जत समझता और बढ़ चढ़ कर इज्जत अफजाई की कोशिश करता इसलिए इमाम साहब की खाने की बारी लग गई थी, रमज़ान का महीना शुरू हो गया, आदत के मुताबिक गांव के एक आदमी ने बड़े शौक से इमाम साहब को दावत दिया, उसने इमाम साहब की बड़ी ताज़ीम वा तकरीम किया, दस्तरखान को तरह तरह के पकवान से सजाया गया, इमाम साहब खाने से फारिग हुए और खुशदिली से दुआएं देते हुए रुखसत हो गए, उधर उस शख्स की बीवी दस्तरख्वान समेटने अाई तो उसे याद आया के दस्तरख्वान के करीब उसने एक मोटी रकम रख कर भूल गई थी मगर अब उसका कहीं नाम ओ निशान नहीं था, पूरा कमरा और घर छान मारा मगर वह रकम ना मिल सकी, जब उसका शौहर नमाज़ पढ़ कर घर आया तो बीवी ने सारा माजरा कह सुनाया शौहर ने भी रकम के ताल्लुक से ला इलमी का इजह...

अगर मर्द एक ऐसी औरत से सोहबत हमबिस्तरी करे जो उसकी बीवी नही है तो ये ज़िना कहलाता है By Al Husaini Network 【 Hafiz Warish Qadri Al Husaini 】

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अगर मर्द एक ऐसी औरत से सोहबत हमबिस्तरी करे जो उसकी बीवी नही है तो ये ज़िना कहलाता है ,  ज़रूरी नही की साथ सोने को ही ज़िना कहते हैं , बल्की छूना भी ज़िना एक हिस्सा है और किसी पराई औरत को देखना आँखों का ज़िना है । ज़िना को इस्लाम में एक बहुत बड़ा गुनाह माना गया है ,  और इस्लाम ने ऐसा करने वालो की सज़ा दुनिया में ही रखी है . और मरने के बाद अल्लाह इसकी सख्त सज़ा देगा । ज़िना के बारे में कुछ हदीस और कुरान की आयत देखिये। हज़रत मुहम्मद ( सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ) ने फ़रमाया मोमिन ( मुस्लिम ) होते हुए तो कोई ज़िना कर ही नही सकता ।  ( Bukhari Sharif , Jild : 3 , Safa : 614 Hadees 1714 ) अल्लाह कुरान में फ़रमाता है और ( देखो ) ज़िना के पास भी ना जाना , बेशक वो बेहयाई है और बुरी राह है " ( Al - quraan : Al - Isra : A - 32 ) ज़िना की सज़ा और अज़ाब : अगर ज़िना करनेवाले शादी शुदा हो तो खुले मैदान में पत्थर मारमार कर मार डाला जाये  और अगर कुंवारे हो तो 100 कोड़े मारे जाये । ( Bukhari Sharif Jild Safa : 615/615 Hadees : 1715 ) आज कल देखने में आया है की इस गुनाह में बहो...

★★सवाल न0 👉 05 ★★ मज़ाराते औलिया पर हाज़िरी लगाना कैसा है By ©Al Husaini Network©【 Hafiz Warish Qadri Al Husaini 】

★★ सवाल न0 👉 05 ★★ *💐मज़ाराते औलिया पर हाज़री लगाना कैसा है❓💐* *🌹 सवाल* 👉🏻 *📿 क्या फरमाते हैं उलमा ए किराम इस मसला में की दरगाह पर पेशी (हाज़री) लगाना कैसा है और इसकी क्या हक़ीक़त है❓* *💦 साईल* ➡️ *🌹 मोहम्मद शफ़ीक़ क़ादरी *🌹 जवाब* 👉🏻 *📿 मज़ाराते औलिया पर हाज़री देना और फैज़ हासिल करना जायज़ व दुरुस्त है* *✨ हदीस शरीफ में है ⤵️* *📖 ’’ عَنْ بُرَیْدَۃَ قَالَ قَالَ رَسُوْلُ اللّٰہِ  ﷺ نَھَیْتُکَمْ عَنْ زِیَا رَۃِ الْقُبُوْرِ فَزُوْرُوہ‘‘* *👉🏻 हज़रत बुरैदा रज़ि अल्लाहू अन्हू से रिवायत है कि हुजूर ﷺ ने फरमाया कि मैंने तुम लोगों को क़ब्रों की ज़ियारत से मना किया था लिहाज़ा (अब तुम्हें इजाज़त देता हूं कि) उनकी ज़ियारत किया करो* 📚 (مسلم جلد اول کتاب الجنا ئز صفحہ ۳۱۴) 📚 (مشکوٰۃ باب زیارۃ القبور الفصل الاول صفحہ ۱۵۴) *💫 शुरू इस्लाम में ज़ियारत ए क़ुबूर मुसलमान मर्दों औरतों को मना कर दिया गया था क्योंकि लोग नए-नए इस्लाम लाए थे, अंदेशा था कि बुत परस्ती के आदि होने की वजह से अब क़ब्र परस्ती ना शुरू कर दें, जब उनमें इस्लाम रासिख हो गया तो यह ममानअत मनसुख हो गई, जैसे शराब हराम हुई...

★★ सवाल न0 👉 04 ★★ क्या हर पीर अल्लाह का वली होता है ? By 👉 Al Husaini Network 【Hafiz Warish Qadri Al Husaini 】

      ★★ सवाल न0 👉 04 ★★ *💐क्या हर पीर वली होता है❓💐* * 🌹 सवाल* 👉🏻 *📿 क्या फरमाते हैं उलमा ए किराम इस मसला में की ज़ैद कहता है कि पीर और वली में फर्क़ है कि हर वली पीर है और हर पीर वाली नहीं, अब सवाल यह है कि क्या ज़ैद का कहना सही है अगर सही है तो पीर और वली में क्या फर्क़ है ? और पीर और वली किसे कहते हैं ? हवाले के साथ जवाब इनायत करें मेहरबानी होगी❓* *💦 साईल* ➡️ *🌹 मोहम्मद सादिक़ आलम* *🌹 जवाब* 👉🏻 *📿 ज़ैद का कहना गलत है क्योंकि ना हर वली पीर है और ना हर पीर वाली है दोनों तारीफें मुलाहिज़ा करें* *✨ वली 👉🏻 वली का मतलब है दोस्त जो अल्लाह का वली होगा वह अल्लाह का दोस्त होगा यानी अल्लाह से मोहब्बत करता होगा और जो अल्लाह से मोहब्बत करना चाहे उसके लिए लाज़िम है कि हुजूर ﷺ की इत्तिबाअ करे* *✨ जैसा इरशाद दे रब्बानी है ⤵️* *📖 قُلْ اِنْ كُنۡتُمْ تُحِبُّوْنَ اللّٰهَ فَاتَّبِعُوْنِىْ يُحْبِبْكُمُ اللّٰهُ* *👉🏻 ए महबूब तुम फरमा दो कि लोगो अगर तुम अल्लाह को दोस्त रखते हो तो मेरे फरमां बरदार हो जाओ अल्लाह तुम्हें दोस्त रखेगा* 📚 (کنز الایمان ،سورۃ آل عمران آیت نمبر۳۱)...

★★सवाल न0 👉 03 ★★ क्या औरत साड़ी पहन करके नमाज़ पढ़ सकती है ?? By 👉 Al Husaini Network 【 Hafiz Warish Qadri Al Husaini 】

             ★★ सवाल न0 👉 03 ★★ क्या औरत साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ सकती है ? नेज़ मर्द तहबंद पहन कर नमाज़ पढ़ सकता है कि नहीं❓ *🌹 सवाल* 👉🏻 *📿 क्या फरमाते हैं उलमा ए दीन औरतें अक्सर वो बेश्तर साड़ी पहनती है तो क्या साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ सकती है जबकि नीचे का हिस्सा खुला रहे, मर्द हज़रात भी सिर्फ तहबंद पहन कर नमाज़ पढ़ते हैं क्या यह जायज़ है❓ * *💦 साईल* ➡️ *🌹 फरहान क़ादरी* *🌹 जवाब* 👉🏻 *📿 औरतों को साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ना तब मना है जबकि बे पर्दगी और जिस्म का हिस्सा नज़र आए वरना पर्दे के साथ साड़ी पहन कर नमाज़ पढ़ने में कोई क़बाहत नहीं,* *👉🏻 और जिन इलाक़ों में साड़ी पहनना खास गैर मुस्लिम औरतों का शआर हो की साड़ी पहनी हुई औरत को देख कर फौरन गुमान हो की यह गैर मुस्लिम है उन इलाक़ों में मुसलमान औरत को साड़ी पहनना जायज़ नहीं है की यह कुफ्फार से तशुब्ह है,* *👉🏻 और जिन इलाक़ों में साड़ी खास गैर मुस्लिम औरतों का शआर ना हो बल्कि मुस्लिम औरतें भी पहनती हो और गैर मुस्लिम औरतें भी तो उन इलाकों में जायज़ व दुरुस्त है, अगरचे नीचे का हिस्सा खुला हो मर्द हज़रा...
سوال نمبر 02 السلام علیکم و رحمتہ اللہ وبرکاتہ علمائے کرام اس مسئلے میں رہنمائی فرمائیں کہ فرض نمازوں میں پہلی رکعت میں صرف آیت الکرسی پڑھنا اوردوسری رکعت میں سورہ اخلاص پڑھ کر نماز اداکر نا کیسا ہے نماز ہو گی یا نہیں جواب عطا فر مایئں سائل  _ وسيم اكرم وعليكم السلام ورحمة الله وبركاته الجواب بعون الملك الوهاب اس صورت میں نماز واجب الاعادہ ہوگی  کہ سورۂ فاتحہ کا پڑھنا دونوں رکعتوں میں واجب ہے یہاں تک کہ ایک آیت بلکہ ایک لفظ کا ترک بھی ترک واجب ہے    ردالمحتار علی الدرالمختار میں ہے" وأما قراءة الفاتحة والسورة أو ثلاث آيات فهى واجبة أيضاً  "( جلد ٢باب صفة الصلاة - ص ١٣٣) اور ترمذی شریف میں ہے "   عن عبادة بن الصامت عن النبي صلى الله عليه وسلم قال لا صلٰوة لمن لم يقرأ بفاتحة الكتاب  "( جلد اول صفحہ ٣٤ )  اس حدیث شریف سے فرض تو نہیں مگر وجوب ضرور مستنبط ہوتا ہے  ۔ اور بہار شریعت جلد اول صفحہ ٥١٧ پر بھی اسی طرح ہے   و الله تعالى اعلم فقير وارث قادري

Juta pahan kar Namaz Adaa karna kaisa hai ??

سوال نمبر 01  السلام علیکم  ورحمتہ اللہ وبرکاتہ  کیا فرماتے ہیں علماۓ دین اگر جوتا بالکل پاک اور صاف ہو نیا ہو تو کیا اس کو پہن کر نماز ادا ہو جاۓ گی؟؟ کیا یہ جائز ھے یا ناجائز ھے؟  اور اگر نماز ہو جاۓ گی تو کیا جوتا اتار کر اس کے اوپر پاؤں رکھ کر نماز پڑھنی ہو گی یا پہن کر بھی نماز صحیح ودرست ھے؟ ؟ ۔۔ وعلیکم السلام ورحمتہ اللہ وبرکاتہ بسم اللہ الرحمٰن الرحیم الجواب بعون الملک الوھاب:-نماز جوتا پہن کر نہیں پڑھ سکتے ہیں کیونکہ نماز کی حالت میں  پاؤں کی ایک انگلی کا لگانا فرض ہے اور دس میں سے اکثر انگلیوں کا لگانا واجبات میں سے ہے۔فرض ترک ہو جانے سے نماز جاتی رہتی ہے سجدۂ سہو سے اس کی تلافی نہیں  ہوسکتی لہٰذا نماز پھر پڑھے۔ اور اگر واجبات میں قصدا ایسا کیا تو نماز ہی نہیں ہوئی۔ اور جوتا پہن کر نماز پڑھے گا تو بالکل یہ ظاہر ہے کہ پاؤں کی انگلی زمین سے نہیں لگے گی۔ جس کی وجہ سے نماز نہیں ہوگی۔اب چاہے وہ جوتا نیا ہو یا پرانا۔اور ایک بات مسجد میں جوتا پہن کر جانا بے ادبی بھی ہے۔ *ردالمحتارمیں ہے دخول المسجد متنعلا سوء الادب۲؎* مسجد میں جوتاپہن کرداخل ہونا بے ادب...